नागौर के जोधियासी गांव में आधी रात महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थापित, एक साल पुराना विवाद फिर गर्माया
नागौर जिले के बीकानेर बॉर्डर से लगे जोधियासी गांव में शनिवार देर रात महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थापित की गई। प्रतिमा लगाने का यह कार्य रात 12 बजे से सुबह 3 बजे तक भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पूरा हुआ।
प्रतिमा स्थापना के दौरान सीओ नागौर, क्षेत्र के छह थानाधिकारी और पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा। गांव में पिछले एक वर्ष से चल रहे विवाद को देखते हुए प्रशासन ने देर रात ही प्रतिमा लगाने का फैसला किया था।
इस दौरान गांव का एक पक्ष प्रतिमा स्थापना के विरोध में रहा, जबकि ग्राम पंचायत की सरपंच कमला मुंड और स्थानीय प्रतिनिधि दयालराम मूंड ने प्रतिमा लगाने का समर्थन किया।
लगातार जारी विवाद को ध्यान में रखते हुए गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
कैसे हुई आधी रात प्रतिमा स्थापना?
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों के एक समूह ने बिना शोर किए रात में ही प्रतिमा को गांव के चौराहे पर स्थापित कर दिया।
कहा जा रहा है कि दिन में भीड़ और विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी में रात को यह काम पूरा किया गया।
रात 12 बजे काम शुरू हुआ और सुबह करीब 3 बजे तक स्थापना का सारा काम खत्म हो गया।
पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद
क्योंकि यह मामला पहले से संवेदनशील था, इसलिए प्रशासन पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था।
- सीओ नागौर खुद मौके पर मौजूद रहे
- छह थानाधिकारी (SHO) तैनात किए गए
- बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता और सुरक्षा बल गांव में लगाया गया
गांव में पुलिस की भारी तैनाती अब भी जारी है, ताकि किसी विवाद या झड़प की स्थिति न बने।
किन लोगों ने समर्थन किया, कौन कर रहा है विरोध?
समर्थन में — सरपंच और उनका समूह
ग्राम पंचायत की सरपंच कमला मुंड और स्थानीय नेता दयालराम मुंड प्रतिमा लगाने के समर्थन में रहे।
उनका कहना है कि महाराजा सूरजमल वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक हैं, और उनकी प्रतिमा से गांव की पहचान और गौरव बढ़ेगा।
विरोध में — दूसरा ग्रामीण पक्ष
गांव का एक बड़ा वर्ग इस स्थापना का विरोध कर रहा है।
उनका कहना है:
- प्रतिमा लगाने की जगह विवादित है
- प्रशासनिक अनुमति पूरी तरह नहीं ली गई
- यह काम आधी रात इसलिए किया गया क्योंकि दिन में लोग रोक देते
- गांव की शांति दोबारा भंग हो सकती है
इसी मुद्दे पर पिछले एक साल से पंचायत व ग्रामीणों में लगातार विवाद चल रहा है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद साधारण नहीं है। गांव के दो पक्षों के बीच यह मुद्दा पिछले 12 महीनों से अटका हुआ था।
मुख्य कारण:
- प्रतिमा लगाने के लिए चुनी गई जगह पर सहमति नहीं बनी
- ग्राम पंचायत के अंदर भी मतभेद थे
- कुछ लोग इसे राजनीतिक लाभ से जोड़कर देख रहे हैं
- स्थानीय समुदायों में विचारों का टकराव
यही कारण है कि प्रशासन लगातार इस मामले को संवेदनशील मानकर संभाल रहा है।
गांव में माहौल कैसा है?
प्रतिमा लगने के बाद गांव में माहौल थोड़ा तनावपूर्ण है।
कई लोग जहां खुशी जता रहे हैं, वहीं विरोध करने वाले लोग असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।
इस वजह से:
- पूरे गांव में पुलिस बल तैनात
- मुख्य चौराहों पर सुरक्षा बढ़ाई गई
- अधिकारियों ने लोगों से शांत रहने की अपील की है
प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह की अफवाह या अनबन से बचा जाए।
महाराजा सूरजमल कौन थे? (संक्षेप में)
महाराजा सूरजमल जाट साम्राज्य के प्रसिद्ध शासक और राजस्थान के वीर योद्धाओं में से एक माने जाते हैं।
वे अपनी:
- बुद्धिमत्ता
- युद्ध कौशल
- नीति
- और न्यायप्रियता
के लिए जाने जाते हैं।
राजस्थान और हरियाणा में आज भी लोग उन्हें गर्व और शौर्य के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
इसी सम्मान के कारण अलग-अलग जगहों पर उनकी प्रतिमाएं लगाई जाती हैं।
अब आगे क्या होगा?
यह मामला अभी भी प्रशासन की निगरानी में है।
आगे दो संभावनाएं हो सकती हैं:
1️⃣ प्रतिमा यथास्थान बनी रहे
यदि दोनों पक्ष बातचीत से समाधान निकाल लेते हैं, तो प्रशासन प्रतिमा वहीं बनाए रख सकता है।
2️⃣ कानूनी प्रक्रिया शुरू हो
यदि विरोध बढ़ा या अनुमति प्रक्रिया में कमी पाई गई, तो प्रशासन कानूनी कदम भी उठा सकता है।
फिलहाल पुलिस और अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर रहे हैं।
निष्कर्ष
जोधियासी गांव में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थापना सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक घटना नहीं है—
यह गांव की राजनीति, सामाजिक मतभेद और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
- रात में प्रतिमा लगाई गई
- पुलिस भारी संख्या में मौजूद
- एक साल पुराना विवाद फिर से खुलकर सामने आया
- गांव में हल्का तनाव लेकिन स्थिति नियंत्रण में

